जबलपुर के नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में इलाज की व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। 4 दिन के नवजात की मौत के बाद परिजनों ने डॉक्टरों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए और अस्पताल में जमकर हंगामा किया।

खुशियों के बीच पसरा मातम

भेड़ाघाट के मीरगंज निवासी हर्ष बर्मन के अनुसार, उनकी पत्नी को 20 मार्च को डिलेवरी के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डिलेवरी के बाद जन्मा बेटा पूरी तरह स्वस्थ था, जिससे परिवार में खुशी का माहौल था। लेकिन कुछ ही दिनों में यह खुशी मातम में बदल गई।

अचानक बिगड़ी तबीयत, दवा के बाद मौत
परिजनों का आरोप है कि जन्म के तीन दिन बाद बच्चे को अचानक सांस लेने में दिक्कत हुई। जब डॉक्टरों को बताया गया, तो उन्होंने दवाई दी। आरोप है कि दवा देने के बाद बच्चे की हालत तेजी से बिगड़ी और कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई।


जूनियर डॉक्टरों पर भरोसा, सीनियर गायब?


मृतक के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि इलाज के दौरान कोई वरिष्ठ डॉक्टर देखने तक नहीं आया। पूरी जिम्मेदारी जूनियर डॉक्टरों पर छोड़ दी गई थी, जो अभी प्रशिक्षण में हैं। उनका कहना है कि जटिल मामलों में अनुभव की कमी मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो रही है।


परिजनों का हंगामा, कार्रवाई की मांग


मासूम की मौत के बाद गुस्साए परिजनों ने अस्पताल परिसर में हंगामा किया और दोषी डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि यदि समय रहते सही इलाज मिलता, तो बच्चे की जान बच सकती थी।

व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

यह घटना एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। मेडिकल कॉलेज जैसे बड़े संस्थान में इस तरह की घटनाएं न केवल चिकित्सा व्यवस्था की खामियां उजागर करती हैं, बल्कि मरीजों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा करती हैं।फिलहाल, अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन घटना के बाद पूरे क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है।