इंदौर जैसी त्रासदी का इंतज़ार? नर्मदा में मिल रहा हड्डियों का पानी

सब जानते हैं, फिर भी खामोशी! नर्मदा में प्रदूषण पर कार्रवाई शून्य

जबलपुर। मां नर्मदा के पवित्र जल को प्रदूषित करने का एक गंभीर और चिंताजनक मामला भेड़ाघाट क्षेत्र में सामने आया है। यहां वर्षों से संचालित एक जिलेटिन फैक्ट्री द्वारा जानवरों की हड्डियों से निकलने वाला गंदा और बदबूदार अपशिष्ट जल सीधे नर्मदा नदी में मिलाया जा रहा है। इस दूषित पानी के कारण नर्मदा का जल प्रदूषित हो रहा है, जिससे इस क्षेत्र के हजारों लोगों की सेहत पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है।
अत्यंत दुर्गंधयुक्त और जहरीला है पानी
स्थानीय लोगों के अनुसार जिलेटिन फैक्ट्री में जानवरों की हड्डियों को उबालने और केमिकल प्रक्रिया से गुजारा जाता है। इस प्रक्रिया के बाद निकलने वाला पानी अत्यंत दुर्गंधयुक्त और जहरीला होता है। आरोप है कि फैक्ट्री प्रबंधन बिना किसी शोधन प्रक्रिया के इस गंदे पानी को नालों के माध्यम से सीधे नर्मदा नदी में छोड़ रहा है। नदी में मिल रहे इस अपशिष्ट जल के कारण आसपास के घाटों पर बदबू फैल रही है और पानी का रंग भी प्रभावित हो रहा है।

इसी जल का इस्तेमाल कर रहे लोग
भेड़ाघाट क्षेत्र के लोग नर्मदा के इसी जल का उपयोग पीने, नहाने और धार्मिक कार्यों में करते हैं। हाल ही में इंदौर में प्रदूषित पानी से कई लोगों की मौत के बाद यहां के लोग और अधिक डरे हुए हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया तो भेड़ाघाट में भी इंदौर जैसी भयावह स्थिति बन सकती है। लोगों को जलजनित बीमारियों, संक्रमण और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का डर सता रहा है।
जिम्मेदारों की आंखें बंद
सबसे हैरानी की बात यह है कि इस जिलेटिन फैक्ट्री द्वारा किए जा रहे प्रदूषण की जानकारी जिम्मेदार विभागों को वर्षों से है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर निगम और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को भी इस समस्या से अवगत कराया गया है। इसके बावजूद फैक्ट्री के खिलाफ आज तक कोई ठोस और सख्त कार्रवाई नहीं की गई। न तो फैक्ट्री को बंद किया गया और न ही अपशिष्ट जल को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए गए।

पर्यावरण संरक्षण अधिनियम का उल्लघंन
स्थानीय सामाजिक संगठनों और पर्यावरण प्रेमियों का आरोप है कि फैक्ट्री प्रबंधन प्रभावशाली है, इसी कारण नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम और जल प्रदूषण नियंत्रण कानूनों का उल्लंघन होने के बावजूद प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। लोगों का कहना है कि नर्मदा केवल एक नदी नहीं, बल्कि आस्था और जीवन का आधार है। इसके जल से खिलवाड़ करना करोड़ों लोगों के जीवन के साथ खिलवाड़ करने जैसा है।

 मामले की जांच होना चाहिए
भेड़ाघाट के निवासियों ने जिला प्रशासन और मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से मांग की है कि तत्काल मामले की जांच कर जिलेटिन फैक्ट्री पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही फैक्ट्री के अपशिष्ट जल को नर्मदा में मिलने से तुरंत रोका जाए और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो। लोगों का कहना है कि यदि अब भी प्रशासन नहीं जागा तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन समय रहते नर्मदा को प्रदूषण से बचाने के लिए ठोस कदम उठाएगा, या फिर मां नर्मदा का पवित्र जल यूं ही जहरीला होता रहेगा।