कुतुबमीनार की आकर्षक वास्तुकला ने खींचा सैलानियों का ध्यान
राजधानी पहुंचने वाले पर्यटकों की सबसे पसंदीदा जगह कुतुबमीनार है। पर्यटन मंत्रालय के पिछले साल के आंकड़ों के मुताबिक, घरेलू के साथ विदेशी सैलानी भी सल्तनत काल की इस इमारत का दीदार करने भारी संख्या में पहुंच रहे हैं।
दूसरे नंबर पर लाल किला देखने बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। पिछले साल दिल्ली की आबादी के करीब 50 फीसदी के बराबर लोग बाहर से बतौर सैलानी राजधानी की सैर करने आए। आंकड़ों के मुताबिक, 2024-25 में दिल्ली पहुंचने वाले पर्यटकों की संख्या करीब 88.5 लाख रही।
आंकड़े बताते हैं कि दिल्ली में सबसे अधिक 34.39 लाख पर्यटक कुतुब मीनार को देखने पहुंचे। इसके बाद करीब 29.63 लाख सैलानियों ने लालकिला और 11.63 लाख ने हुमायूं का मकबरा देखा। वहीं, सबसे कम 683 पर्यटक सुल्तानगढ़ी का मकबरे पर पहुंचे। विशेषज्ञ बताते है कि राजधानी की ऐतिहासिक धरोहरें सिर्फ अतीत की कहानी नहीं कहती, बल्कि आज की अर्थव्यवस्था को भी संजीवनी देती हैं। दिल्ली का जिक्र आते ही लालकिला और कुतुबमीनार सामने आ जाते हैं लेकिन राजधानी में कई ऐसी गुमनाम धरोहरें भी हैं। इनसे आम सैलानी अनजान रहते हैं।
अभाव और अव्यवस्था पर्यटकों की घटा रहे संख्या
पर्यटन उद्योग के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं स्मारकों पर बढ़ती भीड़, स्वच्छता की कमी और सुरक्षा को लेकर लापरवाही कई बार पर्यटकों की संख्या घटा देती है। ऐसे में गलियों के बीच या दूर बसे ऐतिहासिक धरोहरों तक पर्यटक नहीं पहुंच पाते हैं। रिक्शा चालक मनीष ने बताया कि इंडिया गेट, लाल किला और कुतुब मीनार जैसी जगहों पर आसानी से जाया जा सकता है लेकिन कुछ ऐसे इलाके हैं जहां जाना काफी मुश्किल हो जाता है। इसी कारण वहां के लिए सवारियों को थोड़ी तकलीफ उठानी पड़ती है। वहीं, कई स्थलों पर असुविधा भी है। इन सब कारणों से पर्यटकों की संख्या कम होती जा रही है।
पर्यटकों से भाषा ही नहीं, रिश्ते भी मजबूत कर रहे गाइड
दिल्ली में सैलानियों को ऐताहसिक स्थलों और इमारतों का इतिहास और भूगोल समझाने वाले गाइड रफीक बताते हैं कि पर्यटन सिर्फ हमारी रोज़ी-रोटी नहीं, बल्कि दोस्ती का पुल है। जब विदेशी पर्यटक हिंदी बोलने की कोशिश करते हैं तो हमें अपनापन लगता है। उन्होंने बताया कि सभी गाइड भी पूरी कोशिश करते हैं कि पर्यटक केवल घूमें नहीं बल्कि एक रिश्ता बनाकर लौटे।
दिल्ली की गुमनाम इमारतें
भूली भटियारी का महल (करोल बाग) – तुगलक काल की यह रहस्यमयी इमारत अब सुनसान पड़ी है लेकिन इतिहास के कई पन्ने समेटे हुए है
जाहांपनाह शहर की दीवारें – सिरी और तुगलकाबाद के बीच फैली ये प्राचीन दीवारें दिल्ली के भूले-बिसरे अतीत का हिस्सा हैं
बिजय मंडल और बेगमपुर मस्जिद (मालवीय नगर के पास) – स्थापत्य कला के अद्भुत नमूने, जो पर्यटकों की भीड़ से अक्सर दूर रह जाते हैं
किसी भी स्मारक का इतिहास और भूगोल समझने के लिए, उसे सुंदरता की दृष्टि से देखें। ये हमारी धरोहर हैं। इनकी गरीमा को ठेस न पहुंचाएं। इनपर और इनकी दीवारों पर तरह-तरह के चित्र न बनाएं और अपना नाम न लिखें। भारतवर्ष का इतिहास बहुत गौरवशाली एवं प्राचीन है, उसका सम्मान करें।
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